Wednesday, October 7, 2026
Home > प्रदेश > उत्‍तराखंड > मेरी कैंची धाम (बाबा नीब करौरी)यात्रा/न प्रसाद चढ़ता न रसीद कटती और मिलता प्रसाद/डॉ. दीपक अग्रवाल

मेरी कैंची धाम (बाबा नीब करौरी)यात्रा/न प्रसाद चढ़ता न रसीद कटती और मिलता प्रसाद/डॉ. दीपक अग्रवाल

अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
नैनीताल क्षेत्र में स्थित कैंचीधाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। 6 अक्टूबर 2026 को मुझे भी इस धाम में जाकर समाधिस्थ बाबा नीब करौरी और उनकी तपस्थली का दर्शन करने का सौभाग्य मिला। कैंचीधाम एक ऐसा अद्भुत धाम जहाँ न तो प्रसाद चढ़ाया जाता है और न कोई चंदे की रसीद लेकर बैठा है, छोटे या बड़े का कोई भेद नहीं। सभी लाइन से आओ दर्शन करो और चने का प्रसाद लेकर जाओ।
कुमाऊं की पहाड़ियों पर नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर नैनीताल से 17 किमी दूरी पर कोसी नदी के किनारे कैंची नुमा पहाड़ियों पर बाबा नीब करौरी ने हनुमान जी का मंदिर बनाया था। यह स्थान अब कैंचीधाम के नाम से विख्यात हो गया हैं। यहां हनुमान जी, महागौरी के मंदिर के अलावा बाबा नीब करौरी और सिद्धि माता (बाबा की शिष्या) की समाधिस्थ प्रतिमाएं हैं। मंदिर के अंदर फोटो खींचने व वीडियो बनाने पर पाबंदी है।
वैसे तो मुझे महात्माओं के गढ़ हरिद्वार और ऋषिकेश में रहने और उन्हें समझने का अवसर बतौर पत्रकार मिला हैं विभिन्न आश्रमों में भी आना-जाना रहा हैं। लेकिन हनुमान अंश फिल्म देखने के बाद बाबा नीब करौरी के प्रति बढ़ी श्रद्धा को शब्दों बयां कर पाना संभव नहीं है।
लिहाजा 6 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को कैंचीधाम जाने का संकल्प लिया। सुबह 6.40 बजे अमरोहा बस स्टैंड से मुरादाबाद के लिए बस में सवार हुआ। मुरादाबाद से 7.45 बजे हल्द्वानी के लिए बस मिली। बस के रुद्रपुर पहुंचने से पहले मेरी सीट से आगे वाली सीट पर सवार एक लड़की ने अपनी खिड़की का शीशा पीछे कर दिया जिससे मुझे तेज ठंडी हवा लगने लगी। इस हवा से बचने के लिए मैं आगे
खाली हुई सीट पर बैठने के लिए गया। सीट पर बैठने से पहले ही तेज गति से चल रही बस को ड्राइवर ने अचानक रोक दिया, बस के आगे एक बाइक सवार आ गया था। बाइक सवार तो बच गया लेकिन मैं सिर के बल बोनट पर जाकर गिरा और उसके बाद बस के गेट पर जाकर अटक गया। इस हादसे में मेरे सिर पर गुम चोट लगी और बायें पैर का घुटना छिल गया, उसमें खून चटक गया। बस के परिचालक ने मुझे उठाकर बैठाया और पानी पिलाया। करीब 10 मिनट के बाद मैं सामान्य हुआ।
हल्द्वानी पहंुच कर सरकारी अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद मैं टैक्सी से कैचीधाम पहंुचा और दर्शन किए। भीड़ बहुत ज्यादा नहीं थी। बाहर कंबल और प्रसाद की तमाम दुकाने हैं, खूब चहल-पहल है। आसपास कई रेस्टोरेंट संचालित हैं। कैंचीधाम मंे बाबा नीब करौरी के दर्शन करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया। बस में हुए हादसे में चोट तो काफी लगी, कई जगह दर्द भी हो रहा था लेकिन कैंचीधाम आने पर सब सामान्य महसूस हुआ। उसी दिन टैक्सी से पहले कैंचीधाम से हल्द्वानी और वहां से बस से रात 10 बजे अमरोहा लौट आया।
नैनीताल क्षेत्र मंे अधिकतर दुकानों, रस्टोरेेंटों आदि पर बाबा नीब करौरी के पोस्टर लगे हैं और टैक्सियों पर भी बाबा नीब करौरी लिखा हुआ मिलता है। एक टैक्सी पर जय बाबा नीम करौली लिखा था जो कि गलत है सही जय बाबा नीब करौरी ही है। बाबा नीब करौरी हनुमान जी के परमभक्त थे और उन्हें सिद्धियांँ प्राप्त थीं। स्थानीय लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार मानते हैं। बाबा नीब करौरी पर बनी फिल्म हनुमान अंश के चमत्कार के बाद बाबा के भक्तों में इजाफा हो गया।
कर्मफल के सिद्धांत के अनुसार कर्मों के भोग से कोई नहीं बच सकता है लेकिन अगर हम सत्कर्म करते हैं तो बुरे कर्मांे का प्रभाव या असर कम हो जाता है। ऐसा ही मैंने महसूस किया। कैंचीधाम से लौटने पर मुझे सुकून महसूस हुआ। जब हनुमान जी, जय बाबा नीब करौरी।

Print Friendly, PDF & Email
Dr. Deepak Agarwal
Dr. Deepak Agarwal is the founder of SunShineNews. He is also an experienced Journalist and Asst. Professor of mass communication and journalism at the Jagdish Saran Hindu (P.G) College Amroha Uttar Pradesh. He had worked 15 years in Amur Ujala, 8 years in Hindustan,3years in Chingari and Bijnor Times. For news, advertisement and any query contact us on deepakamrohi@gmail.com
https://www.sunshinenews.in