डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
समग्र संघ साहित्य पर डॉ यतीन्द्र कटारिया ने नागपुर में दिया व्याख्यान वहीं राजभाषा संगोष्ठी में हिंदी की महत्ता पर दिया जोर,राजभाषा हिंदी का किया शंखनाद
मुख्य वक्ता रहे कटारिया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जन्मस्थली नागपुर में संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘संघ साहित्यः समग्र चिंतन एवं प्रभाव’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित उत्तर प्रदेश के अमरोहा निवासी, अखिल भारतीय साहित्य परिषद मेरठ प्रांत के प्रांतीय महासचिव एवं संस्कार भारती मेरठ प्रांत के प्रचार प्रमुख डॉ. यतीन्द्र कटारिया विद्यालंकार ने राष्ट्र निर्माण में संघ साहित्य की भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. कटारिया ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साहित्य समाज में नवचेतना, राष्ट्रबोध और सकारात्मक परिवर्तन का संचार करता है। संघ की विचारधारा व्यक्ति निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक की व्यापक दृष्टि प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम का संकल्प प्रत्येक नागरिक के जीवन का मूल मंत्र होना चाहिए। समाज और सरकार की समर्पण भावना, राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता तथा सांस्कृतिक चेतना ही भव्य, दिव्य और वैभवशाली भारत के निर्माण का आधार बन सकती है।
योगी सरकार की नीतियों की सराहना
इस अवसर पर डॉ यतीन्द्र कटारिया के योगदान को दृष्टिगत रखते हुए आयोजन समिति द्वारा उनका अभिनंदन किया गया तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन, राष्ट्रीय महामंत्री पवन पुत्र बादल, अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ. सुशील त्रिवेदी, मधुपेश, चंद्रशेखर, तत्पुरुष गृह राज्य मंत्री महाराष्ट्र शासन पंकज भोरे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
वहीं दूसरी ओर अपरान्ह में केंद्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान नागपुर में आयोजित राजभाषा हिंदी संगोष्ठी में डॉ यतीन्द्र कटारिया ने हिंदी को राष्ट्र की एकता का सूत्र बताया। नागपुर में राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित राजभाषा हिंदी संगोष्ठी में डॉ. यतीन्द्र कटारिया विद्यालंकार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
हिंदी पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ने में समर्थ
संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए प्रसिद्ध हिंदी सेवी व संघनिष्ठ विचारक डॉ. कटारिया ने कहा कि हिंदी पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ने में समर्थ भाषा है। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को अभिव्यक्त करने वाली भाषा है।
उन्होंने कहा कि नागपुर की धरती को हिंदी के वैश्विक विस्तार के इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त है। वर्ष 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन ने हिंदी को वैश्विक मंच पर नई पहचान और दिशा प्रदान की। आज हिंदी विश्व के अनेक देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।
डॉ. कटारिया ने कहा कि स्वतंत्रता, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना की संवाहक हिंदी के प्रति सभी को समर्पित भाव से कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी को ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, प्रशासन और वैश्विक संवाद की समर्थ भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
उन्होंने आह्वान किया कि आजादी के अमृतकाल में हिंदी के माध्यम से राष्ट्रीय गौरव, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र प्रथम की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाए। डॉ कटारिया के राजभाषा हिंदी के संवर्धन एवं प्रचार प्रसार के उल्लेखनीय योगदान के दृष्टिगत राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक धर्म अधिकारी ने शॉल मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक धर्म अधिकारी, उपनिदेशक प्रीतम सिंह, राजभाषा अधिकारी बीके कुलकर्णी तथा संयुक्त आयुक्त राजन शुक्ला तथा संस्थान में कार्यरत कर्मचारी व प्रशिक्षणार्थी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
नागपुर प्रवास के दौरान डॉ. यतीन्द्र कटारिया विद्यालंकार का दोनों महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रचिंतन और राजभाषा हिंदी के प्रति उनकी सक्रिय भूमिका को रेखांकित करता है।
नागपुर में विद्वान विचारक डॉ. यतीन्द्र कटारिया का आरएसएस तथा विद्युत मंत्रालय द्वारा भव्य सम्मान

