डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
उत्तर प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में 25 वर्षों से संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की दोहरी व्यवस्था में कार्यरत लगभग 3000 असिस्टेंट प्रोफेसर सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक मानदेय एवं सेवा विनियमन की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम मंेे जेएस हिदू पीजी कालेज अमरोहा के संबंधित अस्टिटेंट प्रोफेसरों ने सीएम को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया।
योजना का बहिष्कार कर विरोध जताया
वर्ष 2000 में भाजपा शासन द्वारा शुरू की गई उक्त दोहरी व्यवस्था में कार्यरत शिक्षक वर्तमान सरकार से पिछले 9 वर्ष से विनियमितीकरण किए जाने अथवा यूजीसी वेतनमान दिए जाने के साथ सेवाओं की सुरक्षा की मांग लगातार करते आ रहे हैं। परन्तु शासन द्वारा उनकी मांग पर विचार न किए जाने के कारण प्रदेश के विभिन्न जनपदों में शिक्षक अपने-अपने जिला मुख्यालय पर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री की लोकहितकारी शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के उद्देश्य के विरोधी नहीं हैं, बल्कि पिछले 25 वर्षों से लंबित अपनी मूल सेवा समस्याओं के समाधान की मांग को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए इस योजना का बहिष्कार कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
कोई सुनने को तैयार नहीं
शिक्षकों के अनुसार पिछले चार वर्षों में प्रदेशव्यापी स्तर पर हजारों पत्र शासन एवं जनप्रतिनिधियों को प्रेषित किए जा चुके हैं। संगठन के अध्यक्ष डॉ. अरुणेश अवस्थी द्वारा 50 से अधिक जनप्रतिनिधियों के समर्थन पत्र भी शासन को प्रेषित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के समक्ष अनेक अवसरों पर विषय रखा गया तथा विधान परिषद, विधानसभा, विनियमन समिति एवं याचिका समिति सहित विभिन्न स्तरों पर भी शिक्षकों की समस्याओं को प्रस्तुत किया गया है। शिक्षकों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभिन्न पदाधिकारियों से भी अपनी समस्या के समाधान के लिए आग्रह किया है तथा मुख्यमंत्री से भी कई अवसरों पर व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी मांगों के समाधान का अनुरोध किया है।
अनेक शिक्षक 45 से 60 वर्ष की आयु मे
शिक्षकों के अनुसार अनेक शिक्षक 45 से 60 वर्ष की आयु में पहुंच चुके हैं और वर्षों की सेवा के बावजूद अत्यंत अल्प मानदेय पर कार्य करने को विवश हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले लगभग 9 वर्षों से शासन स्तर पर विनियमन, यूजीसी वेतनमान अथवा जीविकोपार्जन के लिए निश्चित एवं सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था किए जाने की प्रत्याशा में प्रतीक्षारत हैं।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों से लिया जाने वाला शुल्क तथा उसके कारण सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त राजस्व व्यय का विषय भी गंभीर विचार की अपेक्षा करता है। शिक्षकों के अनुसार शुल्क प्रतिपूर्ति के कारण प्रतिवर्ष लगभग 82 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व व्यय होने की स्थिति में यदि इस व्यवस्था का नीतिगत पुनर्गठन किया जाए तो विद्यार्थियों को राहत देने के साथ-साथ कार्यरत शिक्षकों के हितों का भी समाधान संभव है।
शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की दोहरी व्यवस्था को समाप्त कर संबंधित विषयों को अनुदान पर लिया जाए तथा उनमें यूजीसी की निर्धारित योग्यता के अनुरूप कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं को नियमानुसार विनियमित/संरक्षित किया जाए। वैकल्पिक रूप से शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान के अनुरूप निश्चित एवं सम्मानजनक मानदेय प्रदान करते हुए उनकी सेवाओं को सुरक्षित किया जाए।
इन्होंने दिया ज्ञापन
ज्ञापन देने वालों में डॉ सौरभ अग्रवाल, डॉ सत्यवीर सिंह, डॉ कावेरी सक्सेना, डॉ मृदुल भलवार, डॉ रचना गुप्ता, डॉ धर्मेंद्र शर्मा, डॉ पवन कुमार गेरा, डॉ अमित पाल सिंह, डॉ अमित शुक्ला, डॉ हर्षदीप यादव,डॉ गार्गी बिश्नोई, डॉ सूरज सैनी, डॉ मनीष टंडन, डॉ अमित माहेश्वरी, डॉ सलमान, डॉ निधि अग्रवाल, डॉ शाजिया बेगम, डॉ अमित भटनागर, डॉ गौतम अरोरा, डॉ ज्योति सिंह, डॉ मंजुला शर्मा, डॉ पीयूष शर्मा, डॉ शिवनी गोयल, डॉ पूनम वर्मा, डॉ प्रियंका शर्मा, डॉ राजीव प्रकाश, डॉ कपिल भारद्वाज आदि रहे।
असिस्टेंट प्रोफेसर निराश और दुःखी/शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का बहिष्कार

