शलभ गुप्ता की कविताः पुरुष और पसंद
डॉ. दीपक अग्रवाल अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज) पुरुष और पसंद ................................................. अपनी पसंद के कपड़े भी, कहां पहन पाता है आदमी। बचपन में मां की पसंद, कॉलेज टाइम में दोस्तों की, शादी के बाद पत्नी की पसंद, यह शर्ट ठीक नहीं है पापा, फिर बच्चों की पसंद की ड्रेस, और उनकी पसंद के जूते भी, फिर पहनता है आदमी। सबकी खुशी में फिर, खुश
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