शलभ गुप्ता की कविता सौ करोड़ का जश्न
डॉ. दीपक अग्रवाल अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज) सौ करोड़ का जश्न सौ करोड़ का जश्न मनाएं कैसे। अश्रुधारा निरंतर बह रही, खुशियां मनाएं कैसे। इस महामारी के काल में, बिछुड गए जो मेरे अपने, उन्हें वापस लाएं कैसे। विधि का विधान यही, खुद को समझाएं कैसे। सौ करोड़ की खुशी में, देश हो रहा जगमग रोशन। इस बनावटी रोशनी में, खुशियां मनाएं कैसे। घरों में
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