शिक्षक दीपक कुमार की कविता ….कावड़ झूम के चली…
डॉ. दीपक अग्रवाल अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज) ... ....कावड़ झूम के चली....... ...सावन मास में कांवड़ झूम के चली, झुंड में चली,मगन हो के चली। शिव की भक्ति में सब कुछ भूल चली, भोले भंडारी की सेवा में बढ़-चढ़ के चली। 1...भक्तों की टोली शिव धाम को चली, सड़कों में गलियारों में नाचती चली। कावड़ लेकर
Read More