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अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
सिंह साहब होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल, गुलड़िया जनपद अमरोहा के योगा इंस्ट्रक्टर डॉ. दीपक अग्रवाल का मानना है कि योग कोई कसरत नहीं वह तो जीवन जीने की कला और साधना हैं। एक दिन और चंद दिन योग करने से कोई लाभ नहीं हो सकता है केवल योग के प्रति जागरूक हो सकते हैं। योग करने से पहले सावधानियां बहुत जरूरी है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को विश्वभर में योग दिवस मनाया जाएगा। हर जगह एक सप्ताह पूर्व से योग के अभ्यास और विभिन्न जागरूकता संबंधी कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। योग एक बहुत व्यापक शब्द है।
महर्षि पतंजलि ने योग सूत्र ग्रंथ में बताया है कि चित्त की वृत्तियों का निरोध योग है। उन्हांेने अष्टांग योग की साधना बताई। इसमें यम, नियम, आसान, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल है।
इस लेख में हम अष्टांग योग की व्याख्या नहीं करेंगे। हम केवल योग की सावधानियों पर चर्चा करेंगे। वैसे तो भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने सामान्य योग अभ्यासक्रम (प्रोटोकाल) जारी किया है। इसमें अष्टांग योग के तीन आयामों पर बल दिया गया है एक आसान दूसरा प्राणायाम और तीसरा ध्यान। आसान और प्राणायाम करने से पहले सावधानियां जरूरी है।
एक तो योग का अभ्यास खाली पेट करना चाहिए। पानी भी आधा घंटा पहले और अभ्यास करने के आधा घंटे बाद पीना चाहिए। जिसकी कमर में दर्द है वह आगे नहीं झुकेगा और जिसके पेट मंे दर्द हो वह पीछे नहीं झुकेगा। अगर बीपी हाई रहता है तो कपालभाति नहीं करना चाहिए। अगर छह माह के दौरान किसी भी प्रकार का आप्रेशन कराया है तो योग अभ्यास नहीं करना चाहिए। अगर कोई हार्ट पेशेंट है तो उसे सांस रोकने वाला अभ्यास नहीं करना है। गर्भवती महिलााआंे को सावधान रहना चाहिए। लड़कियों और महिलाओं को मासिक चक्र के समय पेट पर जोर देने वाले आसनों जैसे पवनमुक्त समेत अन्य आसान नहीं करने हैं।
सामने वाले को देखकर अपनी सीमा से अधिक शरीर को झुकाना या मोड़ना नहीं चाहिए। आसनों को साधने में समय लगता है कोई चंद दिनों में या एक दिन में आसान में सिद्धि नहीं मिलती है। हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति और बनावट अलग-अलग होती है इसीलिए सभी सभी प्रकार के आसान नहीं कर सकते हैं।
हठयोग प्रदीपिका मंे 15 और घेरंड संहिता में 25 आसनों का उल्लेख हैं। हर व्यक्ति की प्रकृति और शरीर को देखकर आसनों का प्राटोकाल तैयार किया जाता है। इसी प्रकार प्राणायाम है। अगर बीपी लो है तो नाड़ी शोधन प्राणायाम अधिक नहीं करना है और अगर बीपी हाई और हार्ट प्राब्लम है तो कपालभाति बहुत धीमी गति से करना है।
निःसंदेह आसान और प्राणायामों से लाभ मिलता है लेकिन अपनी सीमा को देखकर और योग्य प्रशिक्षक से सीखने पर ही लाभ मिलता है। वीडियो में देखकर और मंच को देखकर अनाधिकार चेष्टा से बचना चाहिए।
बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित योग जरूरी है। सभी नियमित योग करे और स्वस्थ रहे।
एसएसएचएमसीएच योगा इंस्ट्रक्टर डॉ. दीपक अग्रवालः योग कसरत नहीं साधना/सावधानियां जरूरी

