बहुमंजिला इमारत और पतंग
इस रचना को मैंने 14 जनवरी 2020 को मकर सक्रंति की पूर्व संध्या पर लिखा है। पंतगबाजी भी हमारी संस्कृति का हिस्सा है। बचपन में मैं पतंग उड़ाता था लेकिन आज बहुमंजिला इमारतों के कारण पंतगबाजी लुप्त हो गई। बचपन की यादों को समेट और आज के माहौल पर पेश
Read More