डॉ.दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
मंडी धनौरा में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर विश्व हिन्दी मंच के तत्वावधान में संस्कार भारती व अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा समायोजित काव्य संध्या तथा भाषा विभूति सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
भाषा विभूति सम्मान से अलंकरण
इस अवसर पर हिन्दी सेवी व विश्व हिंदी मंच के अध्यक्ष डॉ यतीन्द्र कटारिया ने कहा कि मातृभाषा प्रथम अभिव्यक्ति व सांस्कृतिक तथा सामाजिक मूल्यों के प्रवाह का पावन सोपान है। इस अवसर पर भाषा व संस्कृति सेवा के लिए जनपद की वरिष्ठ साहित्यकार शशि त्यागी व बांकेलाल सारस्वत श्योनाथ सिंह तथा डॉ राजेश सारस्वत का भाषा विभूति सम्मान से अलंकरण किया गया।
मंडी धनौरा के मोहल्ला महादेव में आयोजित काव्य संध्या व भाषा विभूति अलंकरण समारोह का मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विद्युत अधिकारी राजन सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौक़े पर शशि त्यागी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा युवा कवि हर्ष अमरोही ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कुछ यूँ कहा-लोगों को अब जगाने में पढ़ रहा हूँ हाँ धीरे ही पर आगे बढ़ रहा हूँ । वरिष्ठ साहित्यकार बांकेलाल ने अपनी प्रस्तुति इस प्रकार दी – हम चले मिलाकर क़दम नए संकल्प लिए, तम के गरदें को चीरें ऐसे जलायें दिये।
सजेगी माथ पर हिंदी तो होगा नाज़
युवा रचनाकार हेमानंदन शर्मा ने हिंदी का गुणगान करते हुए कहा- सजेगी माथ पर हिंदी तो होगा नाज़ हिंदी पर चलेगी, श्वास हिंदी में तो होगा नाज़ हिंदी पर।अभिषेक गुप्ता ने कभी अपने जख्मों को भी छुपाना पड़ता है तो कभी भी ना चाहकर भी मुस्कुराना पड़ता है की प्रस्तुति दी। डॉ राजेश सारस्वत ने पढ़ा कि- मेरी नज़र में राजनीति सिर्फ़ यही है ढपली किसी की ताल देता कोई ताल दोस्तों । कवि दीपक कुमार भोला ने पढ़ा कि-मेरे देश में युवाओं का बोलबाला है युवा शक्ति से मेरा देश निराला है ।
अगर पत्थर नहीं तो फिर आग हम
प्रसिद्ध ग़ज़लकार आकर्ष सफ़र अमरोही ने अपनी कविता का प्रारंभ इन पंक्तियों से किया-अगर पत्थर नहीं तो फिर आग हम रगड़कर एड़ियों से पैदा करेंगे । डा यतींद्र कटारिया ने मातृभाषा को नमन करते हुए कहा कि-है तू माँ का दुलार पिता की शक्ति,मेरे जीवन की प्रथम अभिव्यक्ति ।
कवि राजकुमार पाल राज ने संचालन करते हुए गीत प्रस्तुत किया जबकि कार्यक्रम अध्यक्ष श्योनाथ सिंह शिव ने मातृभाषा वंदन किया । शशि त्यागी ने संस्कृत में रचना प्रस्तुत कर सभी भाषाओं के सम्मान का आह्वान किया ।नरदेव सिंह ने वक्त के साथ-साथ बदलते परिवेश पर तंज करते हुए मातृभाषा को बढ़ाने की अपील की ।
इस मौक़े पर अनीता भटनागर कैलाश कुमार नरेंद्र कटारिया नरेश त्यागी ब्रह्मदेव आर्य कुंज बिहारी बिजेंद्र कुमार राजेंद्र सिंह सोनू कुमार आदि उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम संयोजक डॉ यतींद्र कटारिया ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया ।
मातृभाषा आत्म अभिव्यक्ति/ संस्कृति प्रवाह का सोपानः डॉ. यतींद्र कटारिया

