डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
नगर के शीर्षस्थ शिक्षण संस्थान जे.एस.हिन्दू पी. जी. कॉलेज अमरोहा के सुदर्शन सभागार में ‘कविता चली गॉंव की ओर‘ तथा ‘मेरे मन के उद्गार‘ का विमोचन किया गया।
कविता चली गॉंव की ओर एक दुर्लभ कृति
महाविद्यालय के प्राचार्य डा. वीर वीरेंद्र सिंह ने इस अवसर पर दोनों कृतियों के रचनाकारों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा की कविता चली गॉंव की ओर एक दुर्लभ कृति है जो हमें गॉंव से जोड़ती है। मेरे मन के उद्गार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने रचनाकार दीप्ति खुराना को बधाई दी।
जन कवि के गुणों से विभूषित करती
विश्व हिंदी मंच के अध्यक्ष और राजभाषा सलाहकार समिति भारत सरकार के सदस्य डॉ. यतीन्द्र कटारिया ने बताया कि कविता चली गांव की ओर एक ऐसा अनूठा अद्भुत काव्य संग्रह है जो जमीन से जुड़ा हुआ है और इसमें गीतकार सतेन्द्र धारीवाल धारी ने अपनी दुधारी क़लम और प्रबुद्ध कवि चरित्र का परिचय दिया है। इस काव्य संग्रह में जहां गांव की पगडंडियों, खेतों, खलिहानों, और किसानों के मर्म को स्वधर्म समझते हुए उनकी आवाज बन कविता को शहरों व संस्थानों में से खींचकर गांव की ओर ले जाने की सफल कोशिश की है। उनकी ये विशेषता उन्हें जन कवि के गुणों से विभूषित करती है। आपने अपने काव्य संग्रह में एक से बढ़कर एक गीत, कविता, मुक्तक, दोहे, अतुकांत आदि जो काव्य संग्रह के शीर्षक को उचित ठहराता है।
मेरे मन के उद् गार पर प्रकाश डालते हुए आपने कहा –
कि रचनाकार दीप्ति खुराना ने अपने काव्य संग्रह में व्यक्तित्व, विकास व शिक्षा के प्रति अपनी निष्ठा कूट-कूट कर भरी है।
आधुनिक कृतियों में श्रेष्ठ कृति
वरिष्ठ साहित्यकार भुवनेश कुमार शर्मा भुवन ने कविता चली गांव की ओर नामक काव्य संग्रह को आधुनिक कृतियों में श्रेष्ठ कृति बताते हुए कहा की कविता के मर्म उसके शिल्प आदि के ज्ञान विज्ञान से भली भांति परिचित रचनाकार ने गीतों के अतिरिक्त मुक्तक और दोहे भी खूब कहें हैं। कदम कदम पर गांव की मिट्टी की सौंधी खुशबू की अनुभूति होती प्रतीत होती है गांव की अल्हड़ मदमस्त गौरी का रूप लावण्य मनमोहक मुस्कान उसकी पायल की झंकार आदि उनके गीतों में ऐसा आकर्षण पैदा कर देती है जो श्रोताओं को बहुत देर तक गुदगुदाती रहती है उनके गीतों को सुनकर ऐसा लगता है कि जैसे प्रकृति के इस प्रेमी ने अपने गीतों में ग्रामीण परिवेश की तमाम खूबियों को समेट कर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। जिसे सुनकर बरबस ही श्रोताओं के मुख से वाह! निकल पड़ती है। मैं रचनाकार के गीत की दो पंक्तियों से रचनाकार को आशीर्वाद देना चाहता हूं…
ऊंचे ऊंचे महलों की मीनारें प्यासी लगती हैं।
मेरे छोटे से घर की दीवारें प्यासी लगती हैं।
मेरे मन के उद्गार नामक काव्य संग्रह पर गीतकार सतेन्द्र धारीवाल धारी ने अपने विचार कुछ यूं व्यक्त किए हैं कि-
रचनाकार ने अपनी रचनाओं में सामाजिक परिवेश में कदम कदम पर बिखरी हुई वेदना का सचिव चित्रण किया है आपने मन की व्यथाओं को जिस सहजता से पिरोया है वह प्रबुद्ध रचनाकार के चरित्र का परिचायक है। आपकी रचनाओं ने जीवन के लगभग सभी आयामों को समेटने का प्रयास किया है आपकी यह उपमा रहित कृति निसंदेह काव्य परिवेश की अनुपम कृति है।
डॉ अरविंद कुमार शास्त्री ने ग्रामीण परिवेश पर अपना एक मुक्तक पढ़कर रचनाकार सतेन्द्र धारीवाल धारी को उनके काव्य संग्रह कविता चली गांव की ओर के लिए बधाई दी और कहा कि आपकी कलम नित नूतन यूं ही चलती रहे इसी परिवेश पर। आप बधाई के पात्र हैं ऐसा कहकर उन्होंने काव्य संग्रह को श्रेष्ठ कृति बताया।
डॉ नरेंद्र सिंह ने दोनों काव्य संग्रहों कविता चली गांव की ओर और मेरे मन के उद् गार पर अपने विचार व्यक्त किये और दोनों कृतियों को समय की श्रेष्ठ कृति बताकर अभिभूत किया।
रचनाकार श्रीमती शशि त्यागी ने कविता चली गांव की ओर को सामाजिक परिवेश की एक उत्कृष्ट कृति बताते हुए रचनाकार को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
रचनाकार दीप्ति खुराना ने काव्य संग्रह कविता चली गांव की ओर को कुछ इस तरह व्यक्त किया कि कविता चली गांव की ओर हृदय स्पर्शी और अनूठी रचनाओं से ओत प्रोत है।
संचालन हर्ष अमरोही ने किया और आकर्ष त्यागी, मनोज मनु, शुभम कश्यप, करीम मुरादाबादी हरमिंदर कौर आदि ने कविता चली गांव की ओर पर अपने विचार प्रस्तुत किये।
समय के उत्कृष्ट काव्य संग्रह
अंत में हिंदी साहित्य भारती अमरोहा की अध्यक्ष और जे.एस. हिंदू पी.जी. कॉलेज अमरोहा में हिंदी विभाग अध्यक्षा प्रो. बीना रूस्तगी ने दोनों काव्य संग्रहों को समय के उत्कृष्ट काव्य संग्रह बताते हुए अपने विचार व्यक्त किये। आपने कविता चली गांव की ओर में मां कविता को पढ़कर आपने रचनाकार को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
अब भी मैं अपना बचपन जीता हूं घर के आंगन में।
जब भी मां के हाथों पानी पीता हूं घर के आंगन में।
इस अवसर पर रचनाकार सतेन्द्र धारीवाल और रचनाकार दीप्ति खुराना को विशिष्ट साहित्य अवदान के लिए सम्मानित किया गया। तथा युवा कवियों को उनके साहित्यिक योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सतेन्द्र धारीवाल की पुस्तक ‘कविता चली गॉंव की ओर‘ व दीप्ति खुराना की पुस्तक ‘मेरे मन के उद्गार‘ का विमोचन

