डॉ.दीपक अग्रवाल
बिजनौर/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
16अगस्त को ग्राम फीना के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक से नूरपुर शहीद स्तम्भ तक विगत वर्षों की भांति तिरंगा यात्रा निकाली गयी।
इंजीनियर हेमन्त कुमार ने किया शुभांरभ
यह तिरंगा यात्रा सुबह साढ़े आठ बजे देश भक्ति पूर्ण नारों के साथ शुरु हुई और कारगिल युद्ध के अमर बलिदानी नायक अशोक कुमार प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नूरपुर की ओर बढ़ी। नूरपुर में अमर बलिदानी परवीन सिंह तथा रिक्खी सिंह की प्रतिमाओं पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद यह यात्रा शहीद स्थल पहुंची। इस तिरंगा यात्रा में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ0 उदयराज सिंह मनन राजपूत रोहित राजपूत ललित राजपूत अतुल कुमार राजन चौहान मुकेश कुमार उत्तम वीर सिंह तुषार राजपूत दिव्यांशु गहलौत अंकित राजपूत सागर कुमार नंदराम सिंह सुधीर चौहान रजनीश कुमार नीरज चौहान रवि राजपूत यात्रा संयोजक हेमन्त कुमार आदि शामिल रहे।
इस तिरंगा यात्रा को क्षेत्रीय इतिहास संकलन एवं लेखन अभियान के संस्थापक व संयोजक ग्राम फीना निवासी इंजीनियर हेमन्त कुमार ने जनसहयोग से वर्ष 2021 में शुरु किया था।
तीन सौ पचास सेनानी
इस संबंध में हेमन्त कुमार ने बताया कि 16 अगस्त का दिन जनपद बिजनौर के अलावा ग्राम फीना के इतिहास का बहुत बड़ा दिन है। इस दिन 16 अगस्त 1942 को नूरपुर थाने पर अंग्रेजों भारत छोड़ो अभियान के अंतर्गत सेनानियों ने तिरंगा लगाने का ऐलान किया था। इस प्रण को पूरा करने के लिए नूरपुर क्षेत्र के हजारों सेनानी थाने पर पहुंचे थे जिनमें ग्राम फीना के भी लगभग तीन सौ पचास सेनानी थे। गुनियाखेड़ी के परवीन सिंह तथा असगरीपुर के रिक्खी सिंह ने गोलियों की बौछार के बीच थाने में तिरंगा लगाया और आपने प्राणों का बलिदान दिया। अनेक सेनानी पुलिस की लाठियों और गोलियों से घायल हुए। नूरपुर थाना तिरंगा केस के नाम से चर्चित इस घटना ने जनपद के अलावा मण्डल मुरादाबाद में भी भारी जनाक्रोश पैदा कर दिया था। यह घटना बिजनौर के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है ।
फीना बागी गाँव
इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्राम फीना के सेनानियों द्वारा हिस्सा लेने के कारण फीना को अंग्रेजों ने बागी गाँव घोषित कर दिया था । इस आंदोलन में फीना के दो क्रांतिकारियों बलकरन सिंह तथा परवीन सिंह ने आपने प्राणों का बलिदान दिया। फीना के सोलह सेनानी गिरफ्तार हुए। डॉव भारत सिंह तथा क्षेत्रपाल सिंह को गंभीर चोट लगी। बड़ा विद्रोह मानते हुए अंग्रेजों ने फीना में सैनिक भेजकर बड़ा नुकसान पहुँचाया। अनेक सेनानियों के घरों की कुर्की की गयी तथा गाँव पर सामूहिक जुर्माना लगाया गया।
इन तथ्यों के आलोक में 16 अगस्त का दिन अनेकानेक गौरवशाली घटनाओं का साक्षी है और उस दिन सेनानियों द्वारा अपने अपने घरों से नूरपुर थाने तक तिरंगे के साथ की गयी यात्रा एक अमिट इतिहास और अनेक संघर्षों का दिन बन गया। क्रांतिकारियों द्वारा की गयी उस महान तिरंगा यात्रा की स्मृतियों को नई पीढ़ी में ले जाने के लिए इंजीनियर हेमन्त कुमार ने प्रति वर्ष 16 अगस्त को फीना से नूरपुर तक तिरंगा यात्रा की जनसहयोग से शुरुआत की। इस बार यह निरंतर पांचवी तिरंगा यात्रा थी।
इंजीनियर हेमन्त कुमार ने खोजे सेनानी
इंजीनियर हेमन्त कुमार ने ग्राम फीना के सेनानियों के संघर्ष को खोजने और प्रकाशित कराने का आधारभूत कार्य किया। फिर सेनानियों को समर्पित एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक की परिकल्पना कर हेमन्त कुमार ने स्मारक का डिजाइन बनाया और लोगों को निर्माण के लिए प्रेरित किया। इस क्रम में फीना ग्राम कल्याण समिति ने बेलवाला चौक पर फीनावंशियों से ग्यारह लाख रूपये एकत्र कर भव्य स्मारक का निर्माण कराया। इस समिति के द्वारा हर वर्ष 16 अगस्त को श्रद्धांजली कार्यक्रम का आयोजन कर अगस्त क्रांति दिवस मनाया जा रहा है। समिति द्वारा यहाँ अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित कराये जा रहे हैं। समिति के प्रयासों से यहाँ सौ फीट ऊँचा तिरंगा भी स्थापित कराया गया।
संयोजक इंजीनियर हेमन्त कुमार ने सभी प्रतिभागियों के साथ साथ उत्साहवर्धन करने के लिए मनोज कुमार राजपूत डलहौजी सिंह बृजेन्द्र सिंह देवराज सिंह नरेंद्र कुमार वत्स महिपाल सिंह आदि का आभार व्यक्त किया।
इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम दर्ज
अमृत महोत्सव में इंजीनियर हेमन्त कुमार द्वारा लिखी पुस्तक ग्राम फीना के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनकी संघर्ष गाथा ने इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम दर्ज कराया है। इन्होंने जिला बिजनौर का परिचय नामक पुस्तक लिखते हुए जनपद का गौरव बढ़ाने वाली अनेक इतिहास खोज भी की हैं।
16 अगस्त 1942 की स्मृतियाँ संजोने के लिए निकाली पाँचवी तिरंगा यात्रा

