डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
जनपद अमरोहा के ब्लॉक जोया की एआरपी (विज्ञान)
रश्मि चौधरी ने बताया कि उन्हांेने एआरपी के चुनौतीपूर्ण कार्य को ठहराव से बाहर आने और महिला सशक्तीकरण को मजबूती प्रदान करने के लिए चुना है।
जनपद अमरोहा का ब्लॉक जोया ऐसा है, जहाँ एक नहीं बल्कि दो महिला एआरपी हैं। बाकी किसी ब्लॉक में महिला एआरपी नहीं है। जिले में एआरपी के 35 पद है। इन पदों पर बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों के टीचर्स का लिखित परीक्षा के आधार पर चयन किया जाता है। विज्ञान विषय के एआरपी के लिए रश्मि चौधरी का चयन कर उन्हें जोया ब्लॉक आवंटित किया गया।
लेखक डॉ. दीपक अग्रवाल ने उनसे मुलाकत कर उन्हंे अपनी महिला सशक्तीकरण को समर्पित पुस्तक-‘बढ़ो गगन की ओर‘ (सफल महिलाओं के साक्षात्कार) भंेट की। साथ ही रश्मि चौधरी के अब तक के सफर के संघर्ष पर वार्ता की।
उन्हांेने बताया कि उनका जन्म अमरोहा के गाँव मुकारी में एक जुलाई 1988 को हुआ। उनके पिता जी राजीव कुमार खेती करते हैं, माता जी किरन बाला गृहिणी हैं। वे परिवार में सबसे बड़ी हैं। छोटी बहन राजुल एसपीजी में कमांडो हैं और दूसरी छोटी बहन सोनी गृहिणी हैं। भाई कनिष्क कुमार चड्डा कनाडा में पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रहा है।
उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिक शिक्षा गाँव मुकारी के प्राथमिक विद्यालय से हुई। कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई जनता इंटर कॉलेज, मूंढ़ाखेड़ा से की। वर्ष 2007 में बी0एस-सी0 (बायो ग्रुप) जे0एस0 हिंदू पी0जी0 कॉलेज, अमरोहा से की। वर्ष 2010 में एल-एल0बी0 मेरठ कॉलेज, मेरठ से की। वर्ष 2011 में बी0एड0 आई0आई0एम0टी0 कॉलेज, मेरठ से किया। वर्ष 2013 में एल-एल0एम0 मेरठ कॉलेज, मेरठ से किया। टेट की परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 2015 में बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूल में चयन हो गया। प्रथम नियुक्ति 18.11.2015 को सहायक अध्यापक के पद पर प्राथमिक विद्यालय मूडा विश्नू (गोला गोकरनाथ छोटी काशी) ब्लॉक कुम्भी जनपद लखीमपुर खीरी में हुई।
उन्होंने बताया कि लखीमपुर खीरी से स्थानांतरित होकर 23 जून 2018 को बी0एस0ए0 कार्यालय, अमरोहा मंे ज्वाइन किया। 10 जुलाई 2018 को प्राथमिक विद्यालय इकौंदा (संविलियन विद्यालय) में सहायक अध्यापक बनीं। अब लिखित परीक्षा में चयन के बाद 15 अप्रैल 2025 को जोया के ब्लॉक संसाधन केंद्र, नांरगपुर में ज्वाइन किया।
उन्होंने बताया कि शुरू से ही चुनौतीपूर्ण कार्य करने का स्वभाव रहा है। स्कूल में एक ही जगह रहने से ठहराव सा महसूस हो रहा था, इसलिए एआरपी बनीं। इस क्षेत्र में महिलाएँ आने से झिझकती हैं, जबकि महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत को साबित कर रही हैं। उनकी बेटी आराध्या चौधरी कक्षा तीन में के0पी0एस0, मुरादाबाद में पढ़ती है।
रश्मि ठहराव से बाहर आने और महिला सशक्तीकरण को मजबूती देने को बनीं एआरपी

