डॉ. दीपक अग्रवाल की पुस्तक ‘‘बढ़ो गगन की ओर से साभार‘‘
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
श्रम को जब रंगत मिलती है, माटी को मूरत मिलती है। जीवन में आगे बढ़ने की, खुद से ही हिम्मत मिलती है।
बचपन से ही उनकी आदत रही है कि वे अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण निर्णय स्वयं ही लें। इसलिए पहली कक्षा से कक्षा 8 तक हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद जब विज्ञान वर्ग और कला वर्ग में से एक चुनने का समय आया, तब अपनी क्षमताओं के आधार पर विज्ञान वर्ग लिया। कक्षा 10 में विद्यालय में टॉप कर अपने फैसले को सही साबित किया।
संघर्ष की यह कहानी राज्य शिक्षक पुरस्कार 2024 के लिए चयनित शिक्षिका/कवयित्री प्रीति चौधरी की है और उन्हें 5 सितंबर 2025 को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कक्षा 11 में जब जीव विज्ञान तथा गणित में से किसी एक विषय को चुनना था, तब गणित को चुना, उस समय विद्यालय में केवल दो छात्राओं ने ही गणित लिया था। परिवार का भी दबाव था कि गणित मुश्किल है, जीव विज्ञान ले लो, परंतु गणित विषय के साथ ही पढ़ाई की। कक्षा 12 में फिर विद्यालय टॉपर बनीं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से बी०एस-सी०, एम०एस-सी० (गणित) और बी०एड० प्रथम श्रेणी में किया। वर्ष 2012 में एम०एड० प्रथम श्रेणी में इग्नू से किया।
2 वर्ष तक बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षिका के रूप में कार्य किया। माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रथम नियुक्ति 2011 में जी०जी०आई० सी०, बरखेड़ा, पीलीभीत में हुई। इसके बाद 2012 में स्थानांतरण पर जी० जी०आई०सी०, हसनपुर में कार्यभार ग्रहण किया, तब से विज्ञान/गणित शिक्षिका के पद पर इस विद्यालय में सेवारत हैं। वे एस०आर०जी० गणित भी हैं। गणित विषय में उनके द्वारा बने टी०एल०एम० ने लखनऊ में आयोजित राज्यस्तरीय टी०एल०एम० प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने शिक्षण संग विद्यालय की छात्राओं को विभिन्न जिला स्तरीय, राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया, जिसमें छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विभिन्न स्थान भी प्राप्त किये। साथ ही जिले में शिक्षा विभाग, प्रशासन और पुलिस प्रशासन के कार्यक्रमों में मंच संचालिका के रूप में पहचान बनाई। विभागीय स्तर पर आयोजित विभिन्न सेमिनारों में जनपद का प्रतिनिधित्व किया। स्वीप में उल्लेखनीय भूमिका हेतु व शिक्षक दिवस पर विशिष्ट शिक्षक के रूप में भी अनेक बार डी०एम० ने सम्मानित किया। उनकी साहित्य पढ़ने में रुचि है। धीरे-धीरे मन के भावों को लिखना प्रारंभ किया और इस प्रकार 2019 में अतुकांत कविता संग्रह ‘‘महक गया ये मेरा जीवन‘‘ प्रकाशित हुआ।
कोरोनाकाल में जहाँ जीवन थम-सा गया था, वहीं उन्होंने नई ऊर्जा एवं सकारात्मकता के साथ जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने अनेक विधाओं के नियमों का गहनता से अध्ययन किया तथा विधिवत रूप से मुक्तक, दोहा, गीत, ग़ज़ल, नयी कविता, क्षणिका आदि विधाओं में अनेक रचनाओं का सृजन किया। परिणामस्वरूप कवयित्री के रू 86/160 ख्याति बढ़ती गई। उनकी विभिन्न विधाओं की अनेक रचनाएँ सा दि अंडरलाइन, हिंदी की गूंज, नव किरण सहित विभिन्न पत्रिकाओं एवं समाचार-पत्रों में प्रकाशित हुई हैं। साथ ही आकाशवाणी के रामपुर केंद्र से समय-समय पर काव्यपाठ का अवसर भी मिला। 2024 में उनका प्रथम ग़ज़ल संकलन श्हमने की है प्रीति ग़ज़ल सेश् प्रकाशित हुआ।
उनका मानना है कि हमें हमेशा समय का सदुपयोग करना चाहिए तथा नई ऊर्जा के साथ जीवन के हर दिन को जीना चाहिए।
छोड़ जो कल पर दिया, वो आज करके देखिए। ज़िन्दगी के इन गमों, पर राज करके देखिए। मस्त धुन में फिर थिरकता, बढ़ चलेगा हर कदम। आप मन की भावना को, साज करके देखिए।
गौरतलब है कि 17 अप्रैल 2025 को डॉ0 दीपक अग्रवाल की पुस्तक ‘‘बढ़ो गगन की ओर‘‘ (सफल महिलाओं के साक्षात्कार) का अमरोहा के कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित भव्य विमोचन समारोह का संचालन प्रीति चौधरी और डॉ0 वीरेन्द्र कुमार शुक्ल ने किया था।
अमरोहा गौरव : राज्य पुरस्कार की हकदार बनी शिक्षिका प्रीति चौधरी के संघर्ष की कहानी/आगे बढ़ने की खुद से हिम्मत बटोरी

