डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
अमरोहा ब्लॉक में नवनियुक्त एआरपी अंजू रानी ने कैरियर का शुभारंभ शिक्षा मित्र के रूप में किया था और अब वे एआरपी बनी हैं। इस दौरान उन्होंने जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे। शिक्षा मित्र से शिक्षक और वापस शिक्षा मित्र, इस पीड़ा का भोगा। उसके बाद प्राथमिक विद्यालय में नवीन नियुक्ति और अब एआरपी।
अंजू रानी ने बताया कि उनका जन्म 20 सितंबर 1987 को हसनपुर में हुआ। उनके पिता स्व0 नारायण दास थे और माँ धनवती देवी हैं। उनके बड़े भाई ज्ञानेंद्र सिंह गोरखपुर में सीजेएम और भाभी डॉ0 ज्योति गौतम एडीएम लखनऊ हैं। इसके अलावा एक बहन अर्चना सिंह और दो भाई विपिन कुमार व अमित सिंह हैं। उनकी प्राथमिक शिक्षा हसनपुर के बेसिक शिक्षा परिषद के नगर के प्राथमिक विद्यालय से हुई। कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, हसनपुर से पूरी की।
उन्होंने बताया कि बीए राजकीय रमाबाई अंबेडकर महाविद्यालय, गजरौला से और एमए अंग्रेजी केजीके कॉलेज, मुरादाबाद से किया। उसके बाद एमए राजनीति विज्ञान विषय से प्राइवेट जेएस हिंदू कॉलेज, अमरोहा से किया। वे वर्ष 2009 में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा मित्र बनी और 2015 में प्राथमिक विद्यालय शाहपुर कलां, हसनपुर में शिक्षक के पद पर समायोजन हो गया। बाद में समायोजन रद्द होन पर पुनः शिक्षा मित्र बनी। बीटीसी के बाद वर्ष 2018 में वे टीईटी और सुपर टेट में सफल रहीं। वर्ष 2019 में उनका चयन बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालय के लिए हो गया।
उन्होंने 11 मार्च 2019 को अमरोहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पछदिया में सहायक अध्यापक के पद पर ज्वाइन किया। विद्यालय एकल होने के कारण वे इंचार्ज अध्यापक बनीं। अब उनका अमरोहा ब्लॉक में एआरपी अंग्रेजी के पद पर चयन हुआ है।
उन्होंने बताया कि स्कूलों में नामांकन बढ़ाना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार उनका लक्ष्य है।
अंजू रानी शिक्षा मित्र से एआरपी

