डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
जगदीश सरन हिंदू स्नातकोत्तर महाविद्यालय,अमरोहा के प्राचार्य प्रोफेसर वीर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर थे और उनकी कहानी और उपन्यासों में भारत के ग्रामीण परिवेश का यथार्थ रूप परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य समाज का आईना है।
स्त्री और उपेक्षित समाज का हितैषी
31 जुलाई 2025 को महाविद्यालय के शोध एवं स्नातकोत्तर हिंदी विभाग द्वारा प्रेमचन्द जयन्ती के उपलक्ष में एक विभागीय संगोष्ठी का आयोजन सुदर्शन सभागार में आयोजित किया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां शारदे के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं हिंदी विभागाध्यक्षा प्रोफेसर बीना रुस्तगी ने प्रेमचंद के साहित्य को रुढ़िवादी परम्पराओं, कुरीतियों का विरोधी और किसान, स्त्री और उपेक्षित समाज का हितैषी बताया।
सदियों से शोषित समाज की आवाज को उठाया
डॉ.बबलू सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में दलित एवं दबे कुचले और सदियों से शोषित समाज की आवाज को उठाया। डॉ.विशेष कुमार राय ने प्रेमचंद को युग प्रवर्तक बताया और कहा कि जब हिंदी साहित्य में कविता का वर्चस्व था उस वक्त में प्रेमचंद ने गद्य में समाज के यथार्थ को पाठकों के समक्ष रखा। डॉ. मोहम्मद जावेद ने कहा कि उपन्यास सम्राट के रूप में प्रेमचंद सदैव याद किए जाते रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ.रणदेव सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य को रोमानी जगत से निकाल कर आदर्शाेन्मुख यथार्थ के धरातल पर स्थापित किया।
संविधान के अनुच्छेद 351 का समावेश मिलता
राजनीति विभाग के सहायक आचार्य डॉ प्रदीप तोमर ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में संविधान के अनुच्छेद 351 का समावेश मिलता है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये और शोध छात्रा हनी चाहल तथा पायल संवेदना ने प्रेमचंद के जीवन सिद्धांत और दृष्टिकोण के विषय में विचार रखे। इनके अतिरिक्त रेशू जोशी, स्नेहा, पूर्णकला, सरीरा,अलशिफा नूर तथा हर्ष ने भी प्रेमचंद के जीवन एवं व्यक्तित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। हिंदी विभाग से डॉ सविता एवं डॉ ऋतुराज यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम संयोजक डॉ रणदेव सिंह एवं डॉ राजीव कुमार रहे। इस अवसर पर डॉ नवनीत विश्नोई,डॉ रश्मि गुप्ता, डॉ आभा सिंह ,डा राज किशोर शुक्ला एवं अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
जेएस प्राचार्य प्रोफेसर वीर वीरेंद्रः प्रेमचंद का साहित्य समाज का आईना

