डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/बिजनौर/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
क्षेत्रीय इतिहास संकलन एवं लेखन अभियान के संयोजक इंजीनियर हेमन्त कुमार फीना बिजनौर ने जिला रायसेन मध्य प्रदेश की पहाड़ियों में मानव, सिंह और बाज की मुख आकृतियों की खोज करने का दावा किया है।
हेमंत कुमार ने बताया कि ग्वालियर की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था नवोदय के आमंत्रण पर वे और उनके मित्र पुखरायां से बृजेन्द्र संखवार 14 जून 2025 को भोपाल में आयोजित एक राष्ट्रीय साहित्यिक समारोह में पहुंचे थे । इस मौके पर इन्होंने कई पर्यटक स्थल भी देखे । इसी क्रम में हेमंत कुमार जिला रायसेन में स्थित रातापानी अभ्यारण के पुरा शैल आश्रय स्थल भी देखने गए थे । हेमंत कुमार को यहाँ की कुछ पहाड़ियों को खास कोण तथा खास स्थान से देखने पर इनमें आदिमानव, शेर तथा बाज की मुख आकृतियों का आभास हुआ जिनको इन्होंने कई बार परखा । हेमंत कुमार ने आगे बताया कि यहां बनी प्राकृतिक शैल गुफाओं में दुनिया के सबसे प्राचीन भित्ति चित्र मिलते हैं । यहाँ घूमने के दौरान मुझे कुछ शैल गुफा और पहाड़ियां बड़ी विचित्र आकृतियों की दिखाई पड़ी । इसलिए मैंने उनके चारों तरफ घूमने का प्रयास किया । इनमें से एक स्थान से जब एक पहाड़ी को मैंने देखा तो ऐसा प्रतीत हुआ कि मानो किसी शिल्पी ने पर्वत में आदिवासी इंसान की आकृति गढ़ने की शुरुआत की हो और वह कार्य अधूरा रह गया हो । इसी आकृति को थोड़ा अलग स्थान और एंगल से देखने पर इसमें अगले पैरों पर खड़े और दहाड़ते शेर की मुखाकृति का आभास मुझे हुआ विशालता में यह संरचना गीजा के स्फिंक्स जैसी कही जा सकती है हालाँकि इसका निर्माण प्राकृतिक रूप से हुआ है जबकि स्फिंक्स मानव कृत माने जाते और स्फिंक्स में मानव मुख को तराशा गया है।
इसी तरह एक अन्य पहाड़ी को विशेष स्थान से देखने पर ऐसा प्रतीत हुआ जैसे किसी शिल्पी ने पहाड़ को काटकर बाज की चोंच और गर्दन पहाड़ से लटकती हुई बनाने का प्रयास किया हो । हेमंत कुमार ने स्थानीय व्यक्तियों से इस संबंध में जानकारी ली कि क्या पहले कभी किसी को शेर या आदिमानव महिला के चेहरे तथा बाज की चोंच का आभास कराती ये आकृतियां दिखाई पड़ी तो उन्होंने मना किया । इसके बाद इन्होंने इंटरनेट तथा उपलब्ध अभिलेखों में इस तथ्य को ढूंढने का प्रयास किया पर ऐसा कोई संकेत नहीं मिला । इस प्रकार हेमंत कुमार ने मध्य प्रदेश की पहाड़ियों में मानव सिंह और बाज की मुख आकृतियों की खोज करने का दावा किया है । इनका कहना है कि ये आकृतियाँ दुर्लभ हैं । दुनिया में ऐसी चट्टान बहुत कम स्थानों पर हैं जिनमें मनुष्य या जानवरों या पक्षियों की आकृतियों का आभास हो इस दृष्टि से रातापानी अभ्यारण के उन स्थानों को विकसित कर पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केंद्र बनया जा सकता है जहां से रातारानी अभ्यारण की चट्टानों में ये आकृतियाँ दिखाई पड़ती हैं । इससे रातापानी अभ्यारण को नई पहचान मिलेगी और पर्यटकों द्वारा राजस्व में भी वृद्धि होगी । हेमन्त कुमार अपने अभियान के अंतर्गत स्थानीय इतिहास खोज संकलन लेखन और संवर्धन पर अद्वितीय कार्य किया है जिसमें सैकड़ों तथ्यों के अलावा 45 गुमनाम सेनानियों की खोज प्रमुख हैं । स्थानीय इतिहास पर लम्बे समय से कार्य कर रहे हेमन्त कुमार इससे जुड़ी छह खोजपूर्ण पुस्तक लिख चुके हैं । पत्र पत्रिकों तथा छोटे बड़े समाचार पत्रों में इनके वक्तव्य तथा शोध आधारित जानकारी अक्सर प्रकाशित होती रहती है । इतिहास कार्याे के लिए इनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी दो बार दर्ज हो चुका है ।
चट्टानों में मानव, दहाड़ते सिंह तथा बाज मुखाकृतियों की खोज का दावा

