डॉ. दीपक अग्रवाल
अमरोहा/उत्तर प्रदेश (सनशाइन न्यूज)
जे एस हिंदू डिग्री कॉलेज, अमरोहा में 19 जून 2025 को हिंदी विभाग एवं हिंदी साहित्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में मूर्धन्य साहित्यकार स्व. डॉ. कामता कमलेश (विश्वयात्री) के स्मृतिग्रंथ-‘यादों का पोस्टकार्ड‘ का लोकार्पण किया गया।
अमरोहा को पहचान दिलाई
समारोह की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो.वीर वीरेंद्र सिंह ने की। उन्होंने कॉलेज के भूतपूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित साहित्यकार स्वर्गीय डॉ. कामता कमलेश के कार्यों को याद करते हुए कहा कि डॉ.साहब द्वारा की गई हिंदी सेवा का ही फल है कि हमारा कॉलेज एवं शहर का नाम विश्व के कोने- कोने में पहुंचा। भले ही मैं उनके कार्यकाल में नहीं था किंतु उनके कार्यों एवं शहर के अनगिनत विद्यार्थियों द्वारा मुझे उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व की अनुभूति कई बार हुई। यह कॉलेज सदैव उनके योगदान को संजो कर रखेगा।
कई साहित्यप्रेमियों के लेख
हिंदी की विभागाध्यक्ष प्रो बीना रुस्तगी ने पुस्तक के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब मुझे डॉ.साहब के परिवार ने पुस्तक के परामर्श मंडल में सम्मिलित होने का प्रस्ताव दिया तो मैने सहर्ष ही अपनी स्वीकृति दे दी। क्योंकि सर एवं सर के परिवार के साथ हमेशा ही उनके आत्मीय संबंध रहे है। साथ ही एक साहित्यकार के प्रति इससे उत्तम श्रद्धांजलि और क्या हो सकती थी? उनके सानिध्य में काम करते हुए एक बेटी जैसा प्रेम एवं मार्गदर्शन पाया। आज भी माताजी एवं बहनों के साथ वैसा ही प्रेम है। इस पुस्तक में हमारे शहर के कई सम्मानितजनों जैसे – प्रो. अशोक रुस्तगी, डॉ. संयुक्त चौहान, डॉ.नवनीत बिश्नोई, डॉ.दीपक अग्रवाल, भुवनेश कुमार ‘भुवन अमरोहवी‘ , डॉ. महताब अमरोही, खेमकरण शर्मा, माया शर्मा आदि के लेख एवं संस्मरण भी संकलित हैं। इसके अतिरिक्त देश – विदेश के लोगों के संस्मरण के साथ डॉ. कामता कमलेश की कहानियों पर शोध लेख भी सम्मिलित हैं। परिवार के सभी छोटे- बड़े सदस्यों ने भी अपने शब्द सुमन अर्पित किए हैं।
अमरोहा के गौरव में शामिल
भुवनेश कुमार शर्मा ‘भुवन अमरोहवी‘ ने कहा कि डॉ.कामता कमलेश की जन्मस्थली अमेठी रहते हुए भी उनकी कर्मस्थली अमरोहा रही। उनके योगदान एवं कार्य के कारण ही उनका नाम ‘अमरोहा के गौरव‘ में सम्मिलित किया गया क्योंकि किताबें हमेशा जिंदा रहती हैं-
एक रोज तो टूटेगा सांसों का रिश्ता
जिंदा रहूंगा मैं किताबों में हमेशा।
खेमकरण शर्मा ने कहा कि- ‘मैं उनका विद्यार्थी नहीं था फिर भी उनका स्नेह मैंने भरपूर पाया । माता जी के भाई मदनलाल मेरे मित्र थे। सर ने उच्च शिक्षा में मेरी सहायता भी की। लंबे अंतराल के बाद जब मैं उनके निवास मेरठ मिलने गया तब भी उनके स्नेह में कोई कमी नहीं आई थी।‘
डॉ.अविनाश चौहान ने कहा कि- ‘डॉ.साहब सादगी और सौम्यता की मूर्ति थे। उनके सानिध्य में मुझे कई बड़े साहित्यकारों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त किया।‘
नौकरी को उत्साहवर्द्धन किया
भूतपूर्व प्राचार्या डॉ. वंदना गुप्ता ने कहा कि- ‘डॉ.साहब मेरे संरक्षक, अभिभावक , सहकर्मी एवं गुरु रहे। उन्होंने नौकरी के लिए न केवल मेरा उत्साहवर्धन बल्कि निरंतर मेरा मार्गदर्शन भी किया। अध्यापन में आने की प्रेरणा भी सर ही रहे। उनकी मानवीय प्रवृति ऐसी थी कि वे गैरों को भी अपना बना लेते थे।‘
अमेठी में जन्म अमरोहा कर्मस्थली
उनकी बेटियों जयश्री बरौनियां एवं डॉ.इला जायसवाल ने अपने सूक्ष्म उद्बोधन में सभी लेखकों एवं कॉलेज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुस्तक ‘यादों का पोस्टकार्ड‘ में उनके व्यक्तित्व, शिक्षण पद्धति और मानवीय मूल्यों को आत्मीयता से चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त पुस्तक में उनके साहित्यिक कार्यों, लेखन दृष्टिकोण और समाज में उनके योगदान पर भी गहन चर्चा की गई है। पापा का जन्म अमेठी जिले के कोरवा ग्राम में हुआ था।
आपने उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की। आपकी कर्मस्थली अमरोहा रही जहां आपने लगभग 50 वर्षों तक एक शिक्षक, शिक्षाविद, लेखक एवं साहित्यकार के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की। आपने लगभग 18 पुस्तकों की रचना की जिसमें साहित्य की विभिन्न विधाएं जैसे लेख, कहानी संकलन, बाल कहानियां, उपन्यास, विश्व हिंदी साहित्य का इतिहास आदि सम्मिलित हैं। आपने प्रथम रामचरित मानस का संख्यावाचक कोश का निर्माण किया। आपको कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हैं। आपकी विद्वता का प्रमाण है कि आपको विश्व के कई देशों जैसे – दक्षिण अमेरिका, फ़िजी, त्रिनिदाद, मॉरीशस , टुबैगो आदि में अध्यापन हेतु कई बार आमंत्रित किया गया। आकाशवाणी से कई वार्ताएं भी प्रसारित हुई हैं। यह पुस्तक एक शिक्षक, साहित्यकार, सजग मानव, पति, पिता, नाना के बहुआयामी व्यक्तित्व को शब्दों में संजोने का विनम्र प्रयास है। यह रचना न केवल श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
प्राचार्य प्रोफेसर वीर वीरेंद्र ने आभार व्यक्त किया
कार्यक्रम का संचालन प्रो. बीना रुस्तगी ने किया तथा अंत में प्राचार्य प्रो. वीर वीरेंद्र सिंह द्वारा आभार प्रदत्त किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. कामता कमलेश की पत्नी शांति देवी , बेटियां जयश्री बरौनियां तथा डॉ.इला जायसवाल की गरिमामई उपस्थिति के साथ शिक्षकगण डॉ. बबलू सिंह, डॉ . सविता, राहुल मोहन माहेश्वरी ,डॉ.राजकिशोर शुक्ला,डॉ. हिमांशु , डॉ.अनुराग पांडे, डॉ. मनीष टंडन, डॉ. मयंक अरोरा , डॉ. गौतम अरोरा, रेशु गणमान्य नागरिकों आदि सहित साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

